world environment day 2020; जैव विविधता और वैश्विक महामारी का दौर, Death or Alive

90

Fast Footer|| world environment day 2020;  5 जून 1974 से विश्व में हर साल पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के लिए जागरूक होना और उसके महत्व को समझ कर पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी को जागरूक करना है. विश्व के शक्तिशाली देश, व्यापारी, समाज सेवी, सरकारें और नागरिक मिलकर पर्यावरण पर बात करतें हैं और इसकी महत्वता व भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक तत्वों पर तैयारियों का निष्पादन करते हैं.

विश्व पर्यावरण दिवस, जिसे कोलंबिया में 2020 तक आयोजित किया है, पर्यावरणीय कार्रवाई के लिए सबसे प्रसिद्ध दिन है। 1974 से, यह हर साल 5 जून को मनाया जाता है: सरकारों, व्यवसायों, मशहूर हस्तियों और नागरिकों को एक दबाव वाले पर्यावरणीय मुद्दे पर अपने प्रयासों को केंद्रित करने के लिए।

World Environment Day
जीवन में प्रकृति का महत्व

जीवन में प्रकृति का महत्व

हम जो खाद्य पदार्थ खाते हैं, जिस हवा से हम सांस लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं और जो जलवायु हमारे ग्रह को रहने योग्य बनाती है वह सब प्रकृति ही हमें देती है। उदाहरण के लिए, प्रत्येक वर्ष, समुद्री पौधे हमारे वायुमंडल की ऑक्सीजन के आधे से अधिक का उत्पादन करते हैं, और एक परिपक्व पेड़ हमारी हवा को साफ करते हुए 22 किलो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है और बदले में ऑक्सीजन जारी करता है। उन सभी लाभों के बावजूद जो हमारी प्रकृति हमें देती है, हम अभी भी उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। इसलिए हमें पर्यावरण पर काम करने की आवश्यकता है।

World Environment Day का इतिहास

 सन 1972 में आज ही के दिन सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस को मनाना शुरू किया. इसे स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक पर्यावरण सम्मेलन नाम से कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें करीब 115 देशों ने हिस्सा लिया. इसी के बाद से इसे पूरे विश्व में मनाने की परंपरा शुरू हुई। जिसके बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत में  19 नवंबर 1986 को अधिनियम लागू कर दिया गया. देश में पहला पर्यावरण दिवस भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में मनाया गया था।

World Environment Day
पर्यावरण पर क्या पड़ा कोरोना का असर

पर्यावरण पर क्या पड़ा कोरोना का असर

आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना नाम की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। विश्व के कई देशों को अपनी चपेट में लेने वाली वैश्विक महामारी कोरोना ने कई जीवन लील लिए परन्तु दूसरी तरफ देखा जाए तो पर्यावरण पर इसकी वजह से बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा. कोरोना काल के लॉक डाउन से प्रकृति को अत्यतं फलदाई असर मिले। प्रदूषण स्तर में आई भारी कमी ने जैसे प्रकृति को दुबारा जीवन दे दिया।

बात चीन की करें तो वहां जनवरी से ही कार्बन उत्सर्जन में 25% कमी देखी गई है। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में कार्बन मोनो-ऑक्साइड की मात्र 2019 की तुलना इस साल में आधी पाई गई। भारत की राजधानी दिल्ली में लॉक डाउन के बाद वायु प्रदूषण के स्तर 49 की कमी आई है।

World Environment Day
लॉक डाउन से भारत के पर्यावरण पर असर

लॉक डाउन से भारत के पर्यावरण पर असर

कोरोना और लॉकडाउन के वजह से यूँ तो पूरे विश्व में को ही परेशानियाँ आई हैं पर बात भारत की जाए तो, वर्ष 2019 तक पर्यावरण को लेकर गंभीरता भारत को थोड़ी राहत जरूर मिली है. दो महीने से अधिक चले लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण में व्यापक कमी देखने को मिली है।  हवाएं, नदियां व सागर थोड़े स्वच्छ हुए हैं.

लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद भी यही स्थिति बनी रहेगी या वापस हमारा पर्यावरण दूषित हो जायेगा? विश्व पर्यावरण दिवस पर Fast Footer आपसे अपिल करता है कि हमारा वातावरण तब ही स्वच्छ रह सकता है जब पर्यावरण के साथ तालमेल बिठा कर हम विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाये।

World Environment Day Host

World Environment Day के मेज़बान और थीम

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हर साल विभिन्न देशों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और हर साल कोई एक देश मेजबानी करता है। इस बार जर्मनी के साथ में कोलंबिया मेजबानी कर रहा है। इस बार कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के बीच विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस 2020 को इस बार खास थीम के साथ मनाया जा रहा है. इस बार का थीम है ‘प्रकृति के लिए समय’ बढ़ती मोटर गाड़ियां, कारखाने, लगते उद्योग और कटते वृक्ष, पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहे है. बिना पर्यावरण के जीवन संभव ही नहीं है. ऐसे में हमें वातावरण दूषित करने से बचने के अलावा प्रकृति के साथ तालमेल बिठा कर काम करना होगा.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *