सचिन उपाध्याय को उच्च न्यायालय से मिली बड़ी राहत, IPC 420 अभियुक्त बनाने में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद

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देहरादून। जमीन बिक्री फर्जीवाड़े के आरोप में प्रदेश के बड़े नेता के भाई और व्यापारी सचिन उपाध्याय (Sachin Upadhyay) पर थाना पटेलनगर में दर्ज किये IPC धारा 420 के मुक़दमे में उच्च न्यायालय ने सचिन उपाध्याय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बचाव पक्ष के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसला लिया।

आपको बता दें कि, बीती 31 जुलाई को हरियाणा निवासी प्रमोद बडोनी के दिए आरोप पत्र पर थाना पटेल नगर ने S.I.T. की जाँच के बाद सचिन उपाध्याय पर 420 धारा के अंतर्गत मुकदमा कायम किया, जिसके बाद ही ख़बरों का माहौल गर्म हो गया। प्रमोद बडोनी ने अपने शिकायत पत्र में सचिन उपाध्याय (Sachin Upadhyay) पर आरोप लगाया कि, उन्होंने पैसा लेकर उन्हें जमीन नहीं दी।

बचाव पक्ष की ज़िरह

जतिन दुग्गल, अधिवक्ता

जबकि उनके अधिवक्ता जतिन दुग्गल ने माननीय न्यायलय के समक्ष जमीन का बैनामा और दखिला ख़ारिज प्रस्तुत किये, जो कि प्रमोद बडोनी के नाम पर हैं। साथ ही उन्होंने दर्ज FIR पर भी कई सवाल खड़े किये, जिसमें मुख्यता ‘संदेह’ के आधार पर मुकदमा कायम करने की बात कही गई है। जिस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के डबल बैंच के 2019 “राज्य बनाम एम. आर. हीरामल” आदेश का हवाला दिया। जिसमें ये साफ कहा गया है कि शक (संदेह) के आधार पर बिना जाँच किये मुकदमा कायम नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट में उठे सवाल

जिस शीशमबाड़ा की जमीन मामले में पुलिस ने सचिन को आरोपी बनाया है, उस सौदे में सचिन उपाध्याय (Sachin Upadhyay) का किसी कागज पर जिक्र नहीं है। बैनामा कर्ता योगेश्वर नाम के व्यक्ति हैं और बैनामे के गवाहों में भी सचिन का कहीं नाम नहीं हैं। तो पुलिस ने किस आधार पर सचिन को आरोपी माना? जब वादीमुकदमा ने खुद ही ‘संदेह’ जैसे शब्द का उपयोग किया है तो विवेचक कैसे सीधे मुकदमा लिख सकते हैं? विक्रय पत्र अथवा गवाही में सचिन शामिल नहीं, जिससे वो अपूर्ण माना जाता है! सचिन के अलावा किसी को पार्टी नहीं बनाया गया, जबकि सचिन उपाध्याय का पूरे विक्रय में कहीं भी नाम नही तो वो कैसे आरोपी हुए?

माननीय न्यायलय ने हमारे पक्ष को सुना और हिदायद दी कि अब पुलिस जाँच में सहयोग करें जो हम शुरू से ही कर रहे हैं परन्तु दुर्भाग्यवश हमारे पक्ष को पत्रावली में जोड़ा नहीं गया जिसका अवसर अब हमें मिल रहा है. हमें न्यायलय पर पूरा भरोसा है।

न्यायालय ने पुलिस को दी हिदायत

न्यायालय ने बचाव पक्ष को सुनने के बाद सचिन उपाध्याय (Sachin Upadhyay) की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और पुलिस को हिदायद दी कि, पत्रावली में आरोपी पक्ष के साक्ष्य भी सम्मिलित किये जाएँ और इस तरह शक के आधार पर मुक़दमे लिखने से पहले ध्यान दें।

सचिन (Sachin Upadhyay) का कथन

गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद सचिन उपाध्याय (Sachin Upadhyay) ने अपनी चुप्पी तोड़ी। सचिन बोले कि, उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि, मैंने कुछ गलत नहीं किया। 2012 में जिस प्लाट की रजिस्ट्री हो चुकी थी, उसका मामला 2020 में उठाना उनके खिलाफ एक षड़यन्त्र को जन्म देना है। मैं जानता हूँ इन सब के पीछे वो कौन लोग हैं जो मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। प्रमोद बड़ोनी हमारे आदरणीय हैं उनको भ्रमित किया गया है। मैं अपने खिलाफ षड्यंत्र रचने वाले को जल्द ही बेनकाब करूँगा।”

“मेरे खिलाफ साजिश रची जा रही है और मैं जानता हूँ ये कौन कर रहा है। जल्द ही मैं उसे और उसके हर भ्रष्टाचार को सबके सामने लाऊंगा। ये मुझे और मेरे जरिये मेरे बड़े भाई को बदनाम करने की साजिश है।” – सचिन उपाध्याय 

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