Rajiv Gandhi Birthday: बतौर प्रधानमंत्री उपलब्धियों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं राजीव गांधी

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देहरादून: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की गुरुवार यानि आज 75वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने ट्वीट किया, ‘पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि।’

वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें दूर दृष्टि से परिपूर्ण बताया है। राहुल गांधी ने पिता की तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा, ‘राजीव गांधी एक गजब के द्रष्टा और अपने वक्त से बहुत आगे के व्यक्ति थे। लेकिन इन सबसे परे वो एक उदार और प्रेम से ओत-प्रोत इंसान थे। मैं उन्हें अपने पिता के रूप में पाकर खुद को बहुत भाग्यशाली और गौरवान्वित महसूस करता हूं। हम उन्हें आज और हर दिन याद करते हैं।’

Rajiv Gandhi का जन्म और वैवाहिक जीवन

राजीव गांधी 20 अगस्त, 1944 को हुआ था। वह इन्दिरा गांधी के पुत्र और जवाहरलाल नेहरू के दौहित्र (नाती) व भारत के छठे प्रधानमंत्री थे। राजीव का विवाह एन्टोनिया माईनो से हुआ जो उस समय इटली की नागरिक थी। विवाहोपरान्त उनकी पत्नी ने नाम बदलकर सोनिया गांधी कर लिया। कहा जाता है कि राजीव गांधी से उनकी मुलाकात तब हुई जब राजीव कैम्ब्रिज में पढने गये थे। उनकी शादी 1968 में हुई, जिसके बाद वे भारत में रहने लगी। राजीव व सोनिया की दो बच्चे हैं, पुत्र राहुल गांधी का जन्म 1970 और पुत्री प्रियंका गांधी का जन्म 1972 में हुआ।

Rajiv Gandhi का राजनीतिक जीवन

राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे बने कि वो राजनीति में आए और देश के सबसे युवा पीएम के रूप में उनका नाम दर्ज हो गया। राजीव गांधी एक एयरलाइन पाइलट की नौकरी करते थे, लेकिन 1970 में अपने छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद माता इन्दिरा को सहयोग देने के लिए 1972 में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश लिया। राजीव गाँधीअमेठी से लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने और 31 अक्टूबर 1984 को अंगरक्षकों द्वारा प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने। अगले आम चुनावों में सबसे अधिक बहुमत पाकर वह प्रधानमंत्री बने रहे।

Rajiv Gandhi के महत्वपूर्ण कार्य

प्रधानमंत्री रहते हुए राजीव गांधी ने 21वीं सदी के आधुनिक भारत के निर्माण की नींव रखी थी, जिसका फायदा आज भी देश के लोग उठा रह हैं। दिवंगत पीएम राजीव गाँधी के महत्वपूर्ण फैसलों पर एक नजर..

राजीव गाँधी भारत में सूचना क्रांति के जनक के रूप में

राजीव गांधी को भारत में सूचना क्रांति का जनक माना जाता है। देश के कंप्यूटराइजेशन और टेलीकम्युनिकेशन क्रांति का श्रेय उन्हें ही जाता है। राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक की मदद के बिना उद्योगों का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारत के घरों तक पहुंचाने का काम किया बल्कि भारत में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया। उन्होंने कुछ ऐसा किया कि कंप्यूटर आम लोगों तक पहुंच गया। उस दौर में कंप्यूटर लाना इतना आसान नहीं था। तब कंप्यूटर महंगे होते थे, इसलिए सरकार ने कंप्यूटर को अपने कंट्रोल से हटाकर पूरी तरह ऐसेंबल किए हुए कंप्यूटर्स का आयात शुरू किया, जिसमें मदरबोर्ड और प्रोसेसर थे। उन्होंने कंप्यूटर तक आम जन की पहुंच को आसान बनाने के लिए कंप्यूटर उपकरणों पर आयात शुल्क घटाने की भी पहल की।

पंचायतों को किया सशक्त

राजीव गांधी ने ‘पावर टू द पीपल’ आइडिया को देश की पंचायती राज व्यवस्था को लागू करवाने की दिशा में कदम बढ़ाकर देश के लोकतंत्र को सशक्त बनाने का काम किया था। 1989 में एक प्रस्ताव पास कराकर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने की दिशा में कोशिश की थी। राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सबल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता। उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायतीराज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया।

राजीव गांधी की सोच को तब साकार किया गया, जब 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतीराज व्यवस्था का उदय हुआ। राजीव गांधी की सरकार की ओर से तैयार 64वें संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर नरसिम्हा राव सरकार ने 73वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया। 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई। जिससे सभी राज्यों को पंचायतों के चुनाव कराने को मजबूर होना पड़ा। पंचायतीराज व्यवस्था का मकसद सत्ता का विकेंद्रीकरण रहा।

वोट देने की उम्र सीमा घटाई

पहले देश में वोट देने की उम्र सीमा 21 वर्ष थी, लेकिन राजीव गांधी की नजर में यह उम्र सीमा गलत थी। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र के युवाओं को मताधिकार देकर उन्हें देश के प्रति और जिम्मेदार और सशक्त बनाने की पहल की। 1989 में संविधान के 61वें संशोधन के जरिए वोट देने की उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई। इस प्रकार अब 18 वर्ष के करोड़ों युवा भी अपना सांसद, विधायक से लेकर अन्य निकायों के जनप्रतिनिधियों को चुन सकते थे।

ग्रामीण बच्चों के लिए नवोदय विद्यालय

ग्रामीण बच्चों को मुफ्त आधुनिक शिक्षा देने के मकसद से प्रसिद्ध नवोदय विद्यालयों के शुभारंभ का श्रेय भी राजीव गांधी को जाता है। मौजूदा समय में देश में खुले 551 नवोदय विद्यालयों में 1.80 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। गांवों के बच्चों को भी उत्कृष्ट शिक्षा मिले, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने जवाहर नवोदय विद्यालयों की नींव डाली थी। ये आवासीय विद्यालय होते हैं। प्रवेश परीक्षा में सफल मेधावी बच्चों को इन स्कूलों में प्रवेश मिलता है। बच्चों को छह से 12वीं तक की मुफ्त शिक्षा और हॉस्टल में रहने की सुविधा मिलती है। राजीव गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में भी क्रांतिकारी उपाय किए। उनकी सरकार ने 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) की घोषणा की। इसके तहत पूरे देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण और विस्तार हुआ।

सप्ताह में पांच दिन काम

राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए 1989 में 5 दिन काम का प्रावधान भी लागू किया। इसके पीछे उनका मकसद लोगों को आराम देकर सरकारी छुट्टियां कम करने का था। राजीव गांधी ने दफ्तर बंद होने का समय पांच बजे के बजाय शाम छह बजे कराया, ताकि ज्यादा से ज्यादा काम हो सके और इसके बदले उन्होंने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन शनिवार और रविवार का अवकाश किया। राजीव गांधी ने यह आवधारणा पश्चिमी देशों से लिया था, जिसका फायदा आज भी सरकारी कर्मचारी उठा रहे हैं।

आधुनिक शिक्षा नीति

राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद देश की व्यवस्था में काफी बदलाव लाने का काम किया था। राजीव सरकार ने शिक्षा मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में तब्दील किया था और पीवी नरसिम्हा राव को इस मंत्रालय की कमान सौंप दी गई। इसके अगले वर्ष 1986 में देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई थी। इसके तहत पूरे देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण और विस्तार हुआ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में देश में शिक्षा के विकास के लिए व्यापक ढांचा पेश किया गया था। शिक्षा के आधुनिकीकरण और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने पर जोर रहा था। पिछड़े वर्गों, दिव्यांग और अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा पर अधिक जोर दिया गया था। 14 वर्ष की आयु के बच्चों की शिक्षा को अनिवार्य किया गया था और महिलाओं के बीच अशिक्षा की दर को कम करने के लिए अधिक जोर दिया गया था। व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए थे।

दूरसंचार क्रांति

कम्प्यूटर क्रांति की तरह ही दूरसंचार क्रांति का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। राजीव गांधी की पहल पर ही अगस्त 1984 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिए सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स(C-DOT) की स्थापना हुई। इस पहल से शहर से लेकर गांवों तक दूरसंचार का जाल बिछना शुरू हुआ। जगह-जगह पीसीओ खुलने लगे। जिससे गांव की जनता भी संचार के मामले में देश-दुनिया से जुड़ सकी। इसके बाद 1986 में राजीव की पहल से ही एमटीएनएल की स्थापना हुई, जिससे दूरसंचार क्षेत्र में और प्रगति हुई।

राजीव गांधी की हत्या

कट्टरपंथियों द्वारा इंदिरा गांधी की हत्या करने के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली थी। वे देश के नौवें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर 1984 से 1989 तक देश का नेतृत्व किया। एक चुनाव प्रचार के दौरान 21 मई, 1991 में तमिल चरमपंथियों ने उनकी हत्या कर दी थी। तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में उन्हें मानव बम से मारा गया। एक तस्वीर जिसमें उन्हें मारने वाली लड़की उन्हें माला पहना रही है, जो राजीव गांधी के जीवन की आख़िरी तस्वीर साबित हुई। जैसे ही महिला हमलावर ने उन्हें माला पहनाई और पैर छूने के लिए झुकी, उसने अपने कमर पर बंधे बम का बटन दबा दिया। बम फटा और देश के सबसे ताकतवर परिवार का सबसे ताकतवर इंसान मार दिया गया।

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