India में China सामान का Boycott क्या भारत के लिए 100% संभव ?

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Fast Footer || India vs China : लद्दाख गलवान विवाद के बाद से ही “चीनी सामान का बहिष्कार” सोशल मीडिया पर जोर पकड़ चुका है पर क्या यह व्यवहारिक है? वर्तमान आधुनिक समय में जहाँ भारत पूर्णतया आत्मनिर्भर नही है। ऐसे में चीनी सामान बहिष्कार का नारा[ कामयाब हो सकता है? क्या कहती है मार्किट की गणित?

India vs China में सामान बहिष्कार का उद्देश्य

भारत और चीन के बढ़ते तनाव के बाद चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की आवाज़ लगातार बुलंद हो रही है। यहाँ तक कि मोबाइल एप्प्स को लेकर भी बहिष्कार मुहीम जारी है। India में हर मोर्चे पर China का बहिष्कार करने का दौर जारी है। इस बहिष्कार का उद्देश्य सीमा पर हुए विवाद पर China को सिखाना है। जिसका सबसे मजबूत रास्ता है… चीन का आर्थिक नुकसान।

India में China सामान बहिष्कार कितना संभव

यदि इस बहिष्कार को आंकड़ों और स्तिथि के माध्यम से देखें, तो आकड़ें चौकाने वाले हैं और स्तिथि आसन नहीं दिखती। भारत में China प्रोडक्ट का आयात बड़े पैमाने पर किया जाता है, कई रोजगार इससे जुड़े हैं। भारत संयुक्त व्यापार संघ (WTO) का सदस्य है जिस कारण भारत में चीनी वस्तुओं के आयात की परमिशन है। बढती महंगाई में चीनी प्रोडक्ट्स की रेंज भारत के उपभोगताओं को लुभाती है।

भारत और चीन के मध्य 4.6 लाख करोड़ का प्रतिवर्ष व्यापार होता है यदि भारत में China सामान का बहिष्कार सफल होता है तो China के लिए ये बहुत बढ़ा झटका साबित होगा और यही कोशिश भी है पर आकड़ों पर और भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नज़र डालें तो मन में सवाल आता है क्या ये 100% सफल हो पायेगा।

China बहिष्कार पर क्या कहते है व्यापारिक आकड़ें

भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार है यहाँ उपभोग ज्यादा और उत्पादन न के बराबर है। इलेक्ट्रॉनिक्स में  32.02%, न्यूक्लियर रिएक्टर, बायलर और पार्ट्स में 17.01%, ऑग्निक केमिकल्स में 9.83% तथा फर्टिलाइजर्स में 5.3%  बाज़ार पर China का कब्ज़ा है। भारत में चीन से आयातित वस्तुओं में आयरन और स्टील का 5 . 82% , प्लास्टिक और उससे बनी चीजों का 2.74% , फोटोग्राफी उपकरणों का 2.0 9% , रेलवे और अन्य वाहनों का 1. 81 % पुर्जे भी चीन से आयात किए जाते हैं । इस आंकड़े को देखकर भारत में चीनी  वस्तुओं का बहिष्कार क्या आसान लगता है?

यहाँ तक कि भारत में उपयोग किए जाने वाले फोन भी ज्यादातर China के हैं।  विवो, रियल मी, आई फोन और एओपो आदि फोन इस्तेमाल किए जाते हैं जो कि चीन की कंपनियां हैं। ऐसे कई एप्प भी मार्किट में चलन में हैं जिन पर China की मोहर है। BCCI हो या बड़े कॉरिडोर बनाने के काम भारत में सब जगह China ने अपने पैर पसार रखें हैं।

China का भारत के फार्मा पर बड़ा कब्ज़ा

पिछले कुछ वर्षों से चीन के साथ 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के व्यापार समझौते किये गये हैं। इसी संदर्भ में बोस्टन सलटिंग ग्रुप एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री का 90% कच्चा माल चीन पर निर्भर है और यदि भारत और चीन के मध्य तनाव के कारण रिश्तो में दरार आती है तो भारत के लिए दवा और कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो जाएगी। इस रिपोर्ट के अनुसार ये अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत, चीन की वस्तुओं और उसके औद्योगिक तकनीकी पर कितना निर्भर है।

China Boycott कैसे होगा सफल

पिछले कुछ सालों से China सामान के बायकाट की आवाजें उठती रही हैं। हमारे तीज त्यौहारों पर भी China ने अच्छा मार्किट होल्ड कायम किया जिसका  स्थानीय व्यापारियों और उत्पादन करने वालों पर विपरीत असर हुआ। एक तरफ जहाँ देसी उत्पादन ठप हुए तो दूसरी तरफ चीन हमारे पैसे से अमीर बनता गया। फरवरी २००० में भारत ने चीन की डब्लू टी०ओ० सदस्यता प्राप्त करने के लिए सर्मथन किया था। उसके बाद ही चीन के भारत में आने और व्यापार करने का रास्ता बना भले ही इसमें थोड़ा समय लगा पर चीन तेजी से भारत के बाज़ार पर छा गया।

आज India के पास उपभोगता तो बहुत हैं पर उत्पादन उस स्तर पर नहीं बल्कि सही कहा जाए तो भारत आज बहुत बड़े आर्थिक संकट से घिरा है। बेरोज़गारी हावी हो रही है। सरकारी मशीनरी चरमा रही है। सरहद पर चीन, पाकिस्तन के अलावा नेपाल भी गुर्राने लगा है।

मुश्किलें कई हैं पर यदि इरादा मजबूत हो तो क्या नहीं हो सकता भारत में भी टेलेंट और अविष्कारकों की कमी नहीं और यहीं से इस समस्या का समाधान और China Boycott का सफल रास्ता निकलता है। सरकार और प्रति नागरिक मिल कर काम करें तो भारत के पास बहुत कुछ जो नहीं है वो बन सकता है बल्कि हम चीन के मजबूत व्यापारी प्रतिद्वंदी के तौर पर विश्व में खुद को प्रेजंट कर सकते हैं।

इसके लिए सबसे पहले उन आर्थिक नीतियों को लाने की जरूरत है जिनसे भारतीय उधमियों को आर्थिक और अन्य आवश्यक मजबूती मिले हम अपने लिए खुद ही प्रोडक्ट बनायें। जिन्हें हम भारतीय बाज़ार के साथ ही विदेशी बाज़ारों में भी भेज सकें तभी हमारी स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की चाह सच में बदलेगी और हम China Boycott करने में अपने देश में ही नहीं वरन दूसरें देशों से भी उसे खदेड़ने में कामयाब होंगे।

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