History: 6 जून मराठा साम्राज्य का गौरव दिवस, युवराज संभाजी ने किया पूजन, Social Media पर धूम

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Fast Footer || आज ही के दिन वर्ष 1674 में History के महान नायक मराठा वीर, मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक किया हुआ था. ६ जून 1674 को उन्होंने औपचारिक तौर पर रायगढ़ की गद्दी संभाली थी. मराठा साम्राज्य के महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के राज्याभिषेक की वर्षगांठ शिवराज्याभिषेक दिवस (Shivrajyabhishek Diwas 2020) के रूप में मनाई जाती है.

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शिवाजी महाराज का पूजन करते संभाजी छत्रपति

शिवाजी के चाहने वालों के लिए आज महोत्सव का दिन,,

हर साल शिवाजी के हजारों शिवाजी के चाहने वाले इस समारोह में हिस्सा लेते हैं, लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के चलते इस उत्सव हर साल की तरह भव्य नहीं किया जा रहा है. पर लोग बड़ी तादाद में ऑनलाइन हो कर आज के दिन की ख़ुशी का इज़हार सोशल मीडिया पर करते दिख रहें हैं,

सोशल मीडिया पर भी रची History, शिवराज्याभिषेक दिवस की धूम,,

शिवराज्याभिषेक दिवस का जोश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जबरदस्त देखा जा सकता है. ट्विटर पर सुबह से #शिवराज्याभिषेक ट्रेंड हो रहा है. इसे देखकर आप मराठी लोगों में इस उत्सव का जोश देख सकते हैं.

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महानायक शिवाजी जी का पूजन करते संभाजी छत्रपति

शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी राजे ने ट्विटर पर सभी को दी बधाई,,

शिवाजी महाराज के वंशज और राज्यसभा सांसद संभाजी राजे ने ट्विटर पर सभी को शिवराज्याभिषेक की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने यह भी बताया कि परंपरा के अनुसार रायगढ़ के दुर्गराज में शिवराज्याभिषेक के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं.

History of  छत्रपती शिवाजी महाराज (झलक)

छत्रपती शिवाजी महाराज (1630-1680 ई.) भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्यभिषेक हुआ और वह “छत्रपति” बने।छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध (Gorilla War) की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया।

History; प्रमुख तिथियां और घटनाएं

  • 1594 : शिवाजी महाराज के पिता शाहजी भोंसले का जन्म
  • 1596 : माँ जीजाबाई का जन्म
  • 1630/2/19 : शिवाजी महाराज का जन्म।
  • 1630 : से 1631 तक महाराष्ट्र में अकाल
  • 14 मई 1640 : शिवाजी महाराज और साईबाई का विवाह
  • 1646 : शिवाजी महाराज ने पुणे के पास तोरण दुर्ग पर अधिकार कर लिया।
  • 1656 : शिवाजी महाराज ने चन्द्रराव मोरे से जावली जीता।
  • 10 नवंबर, 1659 : शिवाजी महाराज ने अफजल खान का वध किया।
  • 5 सितंबर, 1659 : संभाजी का जन्म।
  • 1659 : शिवाजी महाराज ने बीजापुर पर अधिकार कर लिया।
  • 6 से 10 जनवरी, 1664 : शिवाजी महाराज ने सूरत पर धावा बोला और बहुत सारी धन-सम्पत्ति प्राप्त की।
  • 1665 : शिवाजी महाराज ने औरंगजेब के साथ पुरन्धर शांति सन्धि पर हस्ताक्षर किया।
  • 1666 : शिवाजी महाराज आगरा कारावास से भाग निकले।
  • 1667 : औरंगजेब राजा शिवाजी महाराज के शीर्षक अनुदान। उन्होंने कहा कि कर लगाने का अधिकार प्राप्त है।
  • 1668 : शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच शांति सन्धि
  • 1670 : शिवाजी महाराज ने दूसरी बार सूरत पर धावा बोला।
  • 1674 : शिवाजी महाराज ने रायगढ़ में ‘छत्रपति’की पदवी मिली और राज्याभिषेक करवाया । 18 जून को जीजाबाई की मृत्यु।
  • 1680 : शिवाजी महाराज की मृत्यु।

छत्रपति के चरित्र की खास बातें 

शिवाजी महाराज को अपने पिता से स्वराज की शिक्षा ही मिली जब बीजापुर के सुल्तान ने शाहजी राजे को बन्दी बना लिया तो एक आदर्श पुत्र की तरह उन्होंने बीजापुर के शाह से सन्धि कर शाहजी राजे को छुड़वा लिया। इससे उनके चरित्र में एक उदार अवयव ऩजर आता है। उसेक बाद उन्होंने पिता की हत्या नहीं करवाई जैसा कि अन्य सम्राट किया करते थे। शाहजी राजे के मरने के बाद ही उन्होंने अपना राज्याभिषेक करवाया हालांकि वो उस समय तक अपने पिता से स्वतंत्र होकर एक बड़े साम्राज्य के अधिपति हो गये थे। उनके नेतृत्व को सब लोग स्वीकार करते थे यही कारण है कि उनके शासनकाल में कोई आन्तरिक विद्रोह जैसी प्रमुख घटना नहीं हुई थी।

वह एक अच्छे सेनानायक के साथ एक अच्छे कूटनीतिज्ञ भी थे। कई जगहों पर उन्होंने सीधे युद्ध लड़ने की बजाय कूटनीति से काम लिया था। लेकिन यही उनकी कूटनीति थी, जो हर बार बड़े से बड़े शत्रु को मात देने में उनका साथ देती रही।

शिवाजी महाराज की “गनिमी कावा” नामक कूटनीति, जिसमें शत्रु पर अचानक आक्रमण करके उसे हराया जाता है, विलोभनियता से और आदरसहित याद किया जाता है।

शिवाजी महाराज के गौरव में ये पंक्तियां प्रसिद्ध हैं-

शिवरायांचे आठवावे स्वरुप। शिवरायांचा आठवावा साक्षेप।
शिवरायांचा आठवावा प्रताप। भूमंडळी ॥

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