विश्वस्तरीय आध्यात्मिक सिटी के रूप में विकसित होगा गढ़मुक्तेश्वर, जाने महत्त्व..

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हापुड़: अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले ‘गढ़मुक्तेश्वर’ (Garhmukteshwar) को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए मलेशियन कंपनी सीआईडीबी होल्डिंग्स ने इन्वेस्टर्स समिट में 5,000 करोड़ का एमओयू किया है। इससे गढ़मुक्तेश्वर और उसके आसपास गंगा किनारे के इलाके का कायाकल्प हो पायेगा।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने भी गढ़मुक्तेश्वर (Garhmukteshwar) के विकास के लिए 20 करोड़ की पहली किस्त प्रस्तावित की है। पर्यटन विभाग ने गढ़मुक्तेश्वर सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत ‘वैदिक ग्रीन स्मार्ट सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। आगे पढ़ें..

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Garhmukteshwar: एतिहासिक महत्त्व

बता दें कि, गढ़मुक्तेश्वर का सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्त्व है। गढ़मुक्तेश्वर, उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का शहर और तहसील मुख्यालय है। इसे गढ़वाल राजाओं ने बसाया था। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर गढ़वाल राजाओं की राजधानी था, बाद में इसपर पृथ्वीराज चौहान का अधिकार हो गया।

Garhmukteshwar: सांस्कृतिक महत्त्व

गढ़मुक्तेश्वर सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला गंगा स्नान पर्व उत्तर भारत का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार, यहाँ पर अभिशप्त शिवगणों की पिशाच योनि से मुक्ति हुई थी, इसलिए इस तीर्थ का नाम ‘गढ़मुक्तेश्वर’ अर्थात् ‘गणमुक्तेश्वर (Garhmukteshwar) (गणों को मुक्त करने वाले ईश्वर) नाम से प्रसिद्ध हुआ।

Garhmukteshwar: धार्मिक महत्व

यहां ‘मुक्तीश्वर महादेव’ के सामने पितरों को पिंडदान और तर्पण (जल-दान) करने से गया श्राद्ध करने की ज़रूरत नहीं रहती। पांडवों ने महाभारत के युद्ध में मारे गये असंख्य वीरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान यहीं मुक्तीश्वरनाथ के मंदिर के परिसर में किया था।

यहां कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को पितरों की शांति के लिए दीपदान करने की परम्परा भी रही है। पांडवों ने भी अपने पितरों की आत्मशांति के लिए मंदिर के समीप गंगा में दीपदान किया था तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक यज्ञ किया था। तभी से यहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगना प्रारंभ हुआ। कार्तिक पूर्णिमा पर अन्य नगरों में भी मेले लगते हैं, किन्तु गढ़मुक्तेश्वर का मेला उत्तर भारत का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।

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