Religion: श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत 2020 के पूजन में चमत्कार है,, Faith

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Fast Footer || श्री गणेश नमः,, सनातन धर्म (Religion) में श्री गणेश का सर्वप्रथम महत्व है, अग्र पूजनीय, देव भूप, गज मुख, गौरी पुत्र जैसे असंख्य मंगलकारी नामों से इन्हें पुकारते हैं. श्री गणेश सभी देवों में सर्वप्रथम पूजनीय देव कैसे बने इसके साथ भी एक बड़ी रोचक कहानी है। एक कथा के अनुसार भगवान शंकर के दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिके में सबसे तेज और होशियार कौन हैं?

इस मत पर परीक्षा हुई तब भगवान शंकर ने दोनों पुत्रों को एक टास्क दिया, कहा जो भी  ब्रम्हांड की तीन परिक्रमा कर पहले वापस आएगा उसको ही श्रेष्ठ माना जायेगा. जिसके बाद कार्तिके अपने वहान मोर पर सवार हो उठ चले किन्तु गणेश ने शंकर और पार्वती जी की तीन परिक्रमाएं कर पिता शंकर को उनके ब्रम्हांड और माँ के धरती होने की संज्ञा बोध करा प्रतियोगिता जीत ली। कहा जाता है इसके के बाद से गणेश को प्रथम पूजनीय होने का आशीर्वाद पिता शंकर जी से मिला.

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श्री गणेश गौरी पुत्र, चित्र संभार-Google

Religion: संकष्टी गणेश चतुर्थी का महत्व व महात्म

आज 8 जून को संकष्टी चतुर्थी का व्रत है। यह व्रत/पूजन गणेश भगवान की कृपा प्राप्त करने और सभी संकटों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी पर गणपति महाराज के आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में चल रहे संकट दूर हो जाते हैं। व्रत से इच्छित फल की प्राप्ति के लिए व्रती इस व्रत में कुछ नियमों का पालन करते हैं.

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कथा पाठ चित्र – google

Religion: संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा

सतयुग में सौ यज्ञ करने वाले राजा पृथु थे। उनके राज्य में दयादेव नाम का ब्राह्मण था। जो वेदों का जानकार था। उसके चार पुत्र थे। पिता ने अपने पुत्रों का विवाह कर दिया। उन चार बहुओं में बड़ी बहु ने एक दिन अपनी सास से कहा मैं बचपन से ही संकटनाशक गणेश चतुर्थी व्रत कर रही हूं।

इसलिए आप मुझे यहां भी ये व्रत करने की अनुमति दें। बहुत की बात सुनकर उसके ससुर ने कहा तुम बड़ी हो। तुम्हें कोई कष्ट नहीं है। किसी चीज की भी कमी नहीं है। तो व्रत क्यों करना चाहती हो। अभी तुम्हारा समय उपभोग करने का हैं। कुछ समय बाद वो बहु गर्भवती हो गई। उसने सुन्दर बालक को जन्म दिया। उसके बाद भी उसकी सास ने व्रत करने को मना किया।

जब उसका पुत्र बड़ा हो गया तब विवाह के समय उसकी बुद्धि भटक गई और वो कहीं चला गया। इस अनहोनी घटना से सब लोग व्याकुल होकर कहने लगे-लड़का कहां गया? किसने अपरहण कर लिया। बारातियों द्वारा ऐसा समाचार पाकर उसकी माता अपने ससुर दयादेव से कहने लगी। आपने मेरा गणेश चतुर्थी का व्रत छुड़वा दिया, जिसके परिणाम से ही पुत्र गायब है।

इस बात से ससुर बहुत दुखी हुए। इसके बाद बहु ने संकटनाशक गणेश चतुर्थी के व्रत का संकल्प किया और वो लड़का वापस आ गया। इसके बाद बहु हमेशा ये व्रत करने लगी। इसके प्रभाव से उसके संकट खत्म हो गए।

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संकष्टी पूजन के लाभ – google

संकष्टी गणेश चतुर्थी पूजन से लाभ

भविष्य पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। ज्येष्ठ महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य और वैवाहिक सुख मिलता है। इसके साथ ही शारीरिक परेशानियां भी दूर हो जाती है। मनोकामनाएं पूरी करने और हर तरह की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए ये संकष्टी व्रत किया जाता है। ज्येष्ठ महीने की इस चतुर्थी पर व्रत और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Religion: चन्द्र उदय का महत्व और समय

चन्द्रमा से जुड़े विशेष व्रत, पर्व और त्यौहार के दिन सुबह उठते ही व्यक्ति के मन में एक सवाल घूमता है कि आज चाँद कब निकलेगा। चंद्रोदय हमारे सौरमंडल में होने वाली एक प्राकृतिक घटना है। आसमान में चन्द्रमा के उदय होने की प्रक्रिया को चंद्रोदय कहते हैं। चांद एक ऐसा विषय है जिसकी चर्चा शास्त्रों से लेकर संगीत और सिनेमा तक में की जाती है।

New Delhi, India के अनुसार चन्द्र उदय व अस्त का समय चन्द्रोदय : 21:56:59 तथा चन्द्रास्त : 07:31:59 होगा।

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